न जाने ये परीक्षाओं
का दौर कभी खत्म हो,
या हमारे रिश्तों का अंत हो।
हूक भरते तुम्हारे वादों का सफ़र,
और उसपर एहसानों का तंज।
हर दिन हर पल,
एहसास दिलाना तुम्हारा,
कि अब हो चुका
रिस्ता खत्म हमारा।
फिर उसपर दिखावे का
मरहम तुम्हारा।
हूक भरते साँसों में जैसे,
ऑक्सीजन कैप
लगाना-हटाना तुम्हारा।
मेरा जीना तो दूर,
मरना भी दूभर करना तुम्हारा।
कुछ तो बुरा किया है मैंने
जो मेरी बर्बादियों का सिलसिला,
बना ये प्यार तुम्हारा।
बहुत हो चुका,
अब तो समझो कि कितना
जरूरी है मेरे लिए प्यार तुम्हारा।
नही निभा सकते, कोई गिला नही
उम्मीदों के बाँध तो,
न बांधना ठीक है तुम्हारा।
या तो साहिल बनो,
या फिर भंवर बन डूबा दो
की अब न सहा जाता ये सताना तुम्हारा।
न जाने कभी ये
परीक्षाओं का दौर कभी खत्म हो,
या हमारे रिस्ते का कभी अंत हो।
*-*-*-*-*-*-*-*-*-*

(◕ᴗ◕✿)
ReplyDelete.
ReplyDelete.
ReplyDelete