संजना


शाम होने को आई है और चंदु जो गया है अभी तक लौट कर नही आया, बैठी संजना चिंता से गड़ी जा रही थी।उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे।उसे ढूँढने जाए तो कहां ? कभी तो वो घर- द्वार छोड़कर अकेले बाहर नही निकली थी।जब से ब्याह कर पति के घर आई थी, तब से एक भी दिन तो उसे चैन न मिला था।मायके में तो माँ ने कभी कुछ करने नहीं दिया था पर यहाँ उसे काम से फुर्सत ही नहीं थी। फिर भी नई शादी और पति के प्यार को अपना समझ वो खिली -खिली रहने का ही कोशिश करती रहती।लेकिन सास के प्रपंच से हारती रही थी। पति अपनी माँ को छोड़ कभी संजना  पर विश्वास नहीं करते थे ,वो जी - जान लगा कर पुरे घर - परिवार को समझने और उन्हें खुश करने में लगी रहती थी ,मगर घर वालो को कोई फर्क नहीं पड़ता। संजना को कम - से - कम अपने पति से अच्छे व्यवहार की उम्मीद थी पर वो भी नहीं मिलता। धीरे - धीरे संजना सब कुछ से ऊबने लगी थी। वो अपने ससुराल की शिकायत माँ से भी नहीं कर सकती थी। बड़े अरमानों से  उन्होंने उसका ब्याह किया था ,अगर जानते कि उनकी बेटी दुखी है तो फिर वो बहुत निराश हो जाते ,जो संजना बिलकुल नहीं चाहती थी। 
दिनभर काम करती और  ढंग का खाना भी नहीं। फिर भी संजना शाम को अपने पति का इन्तजार करती ,कि वो आएँगे तो कुछ मन की बाते होंगी। लेकिन पति सोने से पहले कहाँ दर्शन देने वाले थे। संजना को निराश कर माँ को खुश करना उनका दिनचर्या हो गया था। इन सबसे संजना चिड़चिड़ी होने लगी थी ,उसका उम्मीद दम तोड़ने लगा था। हर वक्त निराश और उदाश ,बस काम करती और एक ही रूम में उसने अपने आपको सिमटा लिया था।बाहरी दुनिया से बिलकुल कटती जा रही थी। आस-पड़ोस से भी नहीं मिलती  ,क्योंकि सबके पास खुशियों की कहानी थी ,लेकिन संजना को अपने घर की शिकायत करना अच्छा नहीं लगता था। इसमें उसे अपनी ही शिकायत नज़र आ रही थी। इसलिए सबसे दूर  रहने का ही रास्ता उसने चुना था।  लेकिन घर में अनबन की शुरुआत होने लगी थी। पति ने हाथ छोड़ना भी सुरु कर दिया था। और संजना उस मार को भी मुंह बंद करके सहने लगी थी। मारता उनका बेटा था और शर्म संजना को आ रही थी कि उसका पति उसपर हाथ छोड़ता है, जिसकी खबर रूम से बाहर नहीं जानी चाहिए थी। 
लेकिन बाते बुरी हो या अच्छी फ़ैल ही जाती है। इसी तरह ये बाते संजना के ससुर के कानो में पहुंची तो उन्होंने पति को   बुलाकर अपनी पत्नी के साथ अकेले जीवन निर्वाह का आदेश दे डाला। बाते पिता जी  के  मुंह से निकली थी इसलिए पूरा तो करना ही था।  संजना खुश थी कि अब उनका  झगड़ा करबाने वाला कोई न होगा। पति ने घर छोड़ने से इंकार न किया था लेकिन उसके मन को गहरा घाव दिया था। इसलिए सामने से तो नहीं , लेकिन कोई न कोई बहाना लेकर लड़ाई यहां भी होती ही रही।  संजना को पति का लड़ाई भी बर्दास्त था ,लेकिन बाते घर से बाहर निकले ये बर्दास्त नहीं था और पति को उतनी ही जोड़ से चिल्लाना और घर की बातो को रोड तक लाना पसंद था। संजना का किस्मत ही रूठा हुआ था ,जो कहीं भी उसे शान्ति से नहीं रहने दे रहा था। उसका पति अवारा या बदचलन नहीं था लेकिन घर से दूर होना वो संभाल नहीं पा रहा था। जिसका गुस्सा हमेसा अपनी पत्नी पर उतारता जा रहा था।  धीरे - धीरे संजना का भी मुंह खुलने लगा था।  समझने लगी थी कि जब समाज में उसकी हंसाई हो ही रही है  तो वो  चुप क्यों रहे। उसने भी  जबाब देना शुरू कर  दिया था। जिसका नतीजा था कि उसका पति आज के झगडे के बाद जो घर से निकला था ,कई घंटो के बाद भी वापस नहीं आया था और संजना अंदर तक डरे जा रही थी। वो क्या करे ,किसके पास जाए कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो शाम ढलने तक भूखे -प्यासे बाहर  ही बैठी रही। तभी अचानक दूर से ही उसे उसका चंदू आता दिखाई दिया। वो सारे झगड़े और फसाद भूल बस पति को ही देखे जा रही थी। जल्दी से उसे पानी देकर खाना पड़ोसने दौड़ी। पति भी चुपचाप सारे काम करता गया। अगले ही दिन संजना  सास के यहां जाने की जिद्द करने लगी कि  थोड़े ही दिन के लिए सही पर हम माँ के घर से घूम कर आते हैं।  चंदू भी मान गया और अगले ही दिन संजना घर  पहुँच गई। संजना को देख सास खुश तो नहीं हुई, लेकिन संजना  साड़ी बातो को नजर - अन्दाज कर कुछ दिन वहाँ रही  फिर अपने पति के साथ लौट आई। उसके बाद हर  4 -6 महीने के बाद संजना खुद से ही पति के साथ ससुराल आती - जाती रही ,सास के व्यवहार से तो वो अवगत थी ही लेकिन कुछ दिनों की बात  समझकर  उसको बर्दास्त करती और फिर वापस लौट आती। इससे उसका पति भी खुश रहने लगा था और संजना का भी दुःख धीरे - धीरे कम होने लगा। आज उसकी एक प्यारी बेटी है और वो तीनो ख़ुशी से जीवन बिता रहे हैं। 
                                          *-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*


Shikha Bhardwaj

Welcome to Aparichita! I'm Shikha Bhardwaj, a blogger passionate about sharing knowledge and life experiences. Here you'll find practical guides on blogging, SEO, AI, finance, travel, spirituality, and personal growth—all designed to help you learn, grow, and stay inspired

1 Comments

If you have any doubt, please let me know.

  1. बहुत सुंदर रचना है आपकी भावनाओं को विचारों को शब्दों में पिरोने की कला कोई आपसे सीखे ।

    ReplyDelete
Previous Post Next Post