दिल का गुलिस्तां-dil ka gulistaan
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दिल का गुलिस्तां-dil ka gulistaan |
तस्वीर तेरी ऊकेर तो ली है इस दिल में,
कभी तुम भी तो दस्तक देकर,
देखो इस दिल मे।
दीवारे जो सुनी है इस दिल की
कभी उसे अपनी यादगार तस्वीरों
की सौग़ात से सजा कर तो देखो।
ये दरों-दीवार दिल की ,
तुम्हारा ही राह तकती है,
कभी इसे अपना आशियाँ बना कर तो देखो।
बेजार पड़े इस दिल की गुलिस्ता में कभी,
अपनी मुस्कुराहट के फूल से..
सजा कर तो देखो।
तन्हाइयों की जो गर्द है,
दिल की कालीन पर
कभी उसे प्यार की मख़मली फूक से,
उड़ा कर तो देखो।
देर की इन्तेहाँ न हो जाए,
बस दो कदम बढ़ा कर तो देखो।
धड़कने भी शोर करने लगी है अब तो,
कभी अपने नर्म स्पर्श का मरहम
लगा कर तो देखो।
हम अब भी वहीं खड़े हैं तुम्हारे ही
इंतज़ार में,
तुम भी आओगी कभी,
इक दिलाशा ही सही, दिलाकर तो देखो।
रह न जाए ख़्वाब अधूरे दिल के,
जीने की एक तसल्ली दिलाकर तो देखो।
दिवाना तेरा गर्दे ख़ाक होने से पहले,
मिलने की आरजू लिए बैठा है,
तसल्ली ही सही दिलाकर तो देखो।
