कैनवास पर, जिंदगी के रंग , कबिता , poem, अभिब्यक्ति, कुछ रंग आस और विस्वास की रंग भरती कहानी।



कैनवास पर जिंदगी के रंग


 कैनवास पर जिंदगी के रंग


 सामने ख़ाली परे कैनवास पर,

 यादो की चित्र उकेरने बैठी हूँ।

ढ़ेर सारे रंग सजा के विभिन्न मौसमो का,

ज़िन्दगी के कुछ आधे-अधूरे फ़साने उकेरने बैठी हूँ ।

आँगन को खुशियों से भरती एक लक्ष्मी है।

उस लक्ष्मी के अनगिनत सपने हैं।

उन अनगिनत सपनों के पंखों में ,

इंद्रधनुषी सा हौसलों के रंग भरने बैठी हूँ।

कुछ रंग प्रभा से आती किरणों का,

कुछ रंग, दिन के थकान को अलविदा कहती 

सूरज की लालिमा का, कुछ रंग सावन के हरियाली का

कुछ रंग भोले की भक्ति का मिला, 

कैनवास पर नई ज़िन्दगी का नया रूप उकेरने बैठी हूँ।

कुछ रंग बरसात की बूंदों का, 

कुछ रंग कुसुम पे परी बूंदों की आभा का,

कुछ बारिश के बाद खिली धूप का।

कुछ रंग कुसुम पे खिली मुस्कान का,

कुछ रंग प्रकृति के हर रूप का

सारे रंग शुभता का, खुशी का, थोड़े से संघर्षो का,

कुछ बारीक और कुछ मोटी कूची संग,

कैनवास पर सारे यादो का रंग मिला, 

ज़िन्दगी में नया रंग भरने बैठी हूँ।

 कैनवास पर जिंदगी के रंग



✍️❣️Upeksha❣️💐

 



Shikha Bhardwaj

Hi, I'm Shikha. I help English learners improve vocabulary, grammar, speaking confidence, and communication skills through practical lessons and real-life examples.

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