यादों की धूल,yaado ki dhul,कविता,poem, शायरी, अभिव्यक्ति।

यादों की धूल। 

यादों की धूल। 



जिसे कब से ढूंढ़ रही थी मैं, 

हाँ वो ठीक वहीं पड़ी मिली।

धूल फाँकते आलमारियों के किसी रैक में।

निकाला, धूल को साफ किया।

ठीक उसी बिस्तर पर लिटाया,

जहाँ हमने ख़्वाब बुने थे।

उन ख्वाबो को और धूल में लिपटे ,

हमारी यादो की एलबम को,

आज फिर गुज़रे वक्त के बंद पड़े तालो से,

आज़ाद किया और तुमको खूब याद किया।

जैसे वक्त से धूल झड़ी,

फिर वही खूबसूरत कमल सा खिला हमारा कल,

हमारे सामने आ खड़ा हुआ।

मुस्कुराता, हसीन सपने दिखाता हमारा कल।

उपेक्षा, अब इस कल को न जाने देंगे,

बाँध इसे पक्के धागे की डोर से,

न धूल नया कोई जमने देंगे।

हाँ जिसे मै ढूंढ रही थी ,

धूल भरी  यादो में लिपटा  हमारा कल। 

यही तो है। 


✍️उपेक्षा❣️


 यादों की धूल,yaado ki dhul,कविता,poem, शायरी, अभिव्यक्ति। कुछ यादें  होती हैं , जिनको समय का धूल धुंधला कर  देता है , हमें समय-समय पर उन धूल को प्यार के फुक से साफ़ करते रहना चाहिए। 

उम्मीद है, आपको पसंद आए , कृपया अपना सुझाव जरूर दे। 

धन्यवाद। 

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