Jindgi_जिंदगी

 Jindgi,जिंदगी

Jindgi,जिंदगी


जिंदगी !
एक कहानी, एक फ़लसफ़ा या मृगतृष्णा !
एक अनबुझी प्यास,एक दौर,एक स्पर्धा।
कुछ पाने की चाह में,
न जाने कितने अनमोल पल,
और रिस्ते खोते जाना।

मिला तो बहुत-कुछ.....
पर क्या मुमकिन है....
 उस पल औऱ उन रिस्तो का मोल चुकाना।

जिंदगी !
 कभी जो तेरा सर्वश्व था ,
आज वो ख़ुद काल  के वश में है। 
छोड़ गया तुझे और तू बस जद में है। 

वो तेरा हमदर्द था....
अब रह गया बस तेरा दर्द है। 
जिंदगी!
हर दिन नई  हकीकतों की चमाट सा है। 
हर चेहरे पर मुखौटे बंद कपाट सा है। 
अभी तो बहुत परदे उठने है,
और बहुत नकाब गिरने है। 

चाँद -तारो की फेहरिस्त बनाने वाले

आज वक्त भी उसके पास बेदम सा है।

जिंदगी !

रेगिस्तान में मृगमरीचिका सा है ,

जैसे धरा और गगन दूर से  एक सा है। 

पास जाओ, बस खाली पड़ा सा है। 

तुम्हरे ख्यालो की  तरह ,
न आज है , न आने वाला कल है। 
जिंदगी !
पल में सुकून, पल में बोझ सा है। 


✍️Shikha Bhardwaj ❣️





Post a Comment

If you have any doubt, please let me know.

Previous Post Next Post