Khatte-mithe,खट्टे-मीठे फ़ासले
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Khatte-mithe,खट्टे-मीठे फ़ासले |
Khatte-mithe,खट्टे-मीठे फ़ासले
सुनो न!
ये तीखा गुस्सा,
तुम्हारी मीठी मुस्कान पर हावि हो रहा है।
और मेरी आँखों से वेबजह ही,
नमकीन सागर छलके जा रहा है।
छोड़ो न!
दो कदम तुम और दो मैं बढ़ाती हूँ ।
ये खट्टे-मीठे फ़ासले जरा कम करते हैं।
आँखों से जरा तुम मुस्का दो......
दिल से जरा मैं शर्मा लेती हूँ।
और इन खट्टे-मीठे,तीखे
विवादों को उलझाकर
जीवन की नई रेसिपी बनाते हैं।
✍️Shikha Bhardwaj❣️
