Adab,अदब,शायरी, quotes, कविता
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Adab,अदब,शायरी, quotes, कविताAdab,अदबसाहब! दो दिन हुए मिले... |
- और हथेली पर जान लेकर खड़े हो...
- काजू-पिस्ते की तरह!
- तुम्हे पता नहीं, ये अदबी मुझे पसंद नहीं।
- चासनी में घुले हुए, हर बात की चसक नहीं।
- इतने चोट खाएं हैं..कि अब दिल का रुमाल बना,
- बड़ी बेअदबी से पसीना पोछते हैं ।
- गर टूट भी जाए छन से, तो क्या?
- उसकी खनक अब मेरे कानों तक आती नही।
- ये हुनर भी मैंने, सीखी है..तुमसे ही कहीं।
- वरना!
- फूल की पंखुड़ियाँ तो क्या?
- बाग के सूखे पत्तों से भी,
- पेश आते थे बड़े तमीज़ से।
✍️Shikha Bhardwaj ❣️
