चौखट_chaukhat_कविता_shayri

 चौखट,chaukhat

चौखट,chaukhat,कविता,shayri



चौखट,chaukhat

फिर से वही आहट, फिर से वही दस्तक़,

 फिर से उसे वही चौखट याद आई है।

मालूम होता है कि फ़िर से वो सदमें में है।

फिर से वो कहीं ज़लील हो आया है।

वो सदमें में हैं, और कोई कैसे चैन ले पायेगा।

उसकी  सोच भी तो उँची है,

ख़ुद की ख़ुशी और गम की परवाह बहुत तौलता है।

 मैं भी ख़ुश हूँ, 

वक़्त उसे फिर उसी चौखट खींच ले आया है।

माना मेरी ये तंगदिली है, 

हो ना!

मुझे परवाह नहीं।

तिनका-तिनका एहसास बिखेर,

 कतरा-कतरा  प्यारा घरौंदा मेरा उसने जलाया है।

जज़्बात! 

हाँ है न उसकी भी है फिक्र उसे,

जब उसकी खुद पे बन आती है।

जर्रा-जर्रा चुन तमस का उसने दामन मेरा सजाया है।

वक़्त कहाँ किसी की एक सी होती है।

पहले भी आया था, अब फिर आया है।

मुझे भी सीख परख की दे,

सयाना मुझे भी बनाया है।

और उसे फिर उसी चौखट ले आया है।


✍️Shikha Bhardwaj❣️

Shikha Bhardwaj

Hi, I'm Shikha. I help English learners improve vocabulary, grammar, speaking confidence, and communication skills through practical lessons and real-life examples.

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