काश! कुछ तो बरकत होती तेरे ईश्क़ में... ज़िन्दगी का ये सफर यूँ तन्हा न होता।

काश! कुछ तो बरकत होती तेरे ईश्क़ में.



काश! कुछ तो बरकत होती तेरे ईश्क़ में...
ज़िन्दगी का ये सफर यूँ तन्हा न होता।


काश! कुछ तो बरकत होती तेरे ईश्क़ में...
ज़िन्दगी का ये सफर यूँ तन्हा न होता।


 काश! कुछ तो बरकत होती तेरे ईश्क़ में...
ज़िन्दगी का ये सफर यूँ तन्हा न होता।

माना तेरे गैरहाजिरी ने बहुत कुछ सिखाया है,
पर इतना भी सीखना भला किस काम का..
कि कोई भी चेहरा रहा न हमसाया है।

जो बीत गया..तूफ़ान के बाद की ख़ामोशी है..
जो आनेवाला है....वो निःशब्द कराह है।

आँखों के समंदर ने सारे ख़्वाब धो डालें है।
दूर तक बस ख़ामोशी है... तन्हाई है।
एक आहट है...जो सूनेपन की है।

बाहर सरसो का खेत खिला है....
वसंत ने दस्तक दी है।
पर मन भूमि है...जो मरुभूमि हुआ पड़ा है।

तुम तो बड़े भोले थे..
यूँ अचानक ही कौन सी जादूगरी सीख ली ?
मैं राह ही पड़ी रही.....
और तुमने तो मंजिल भी पा ली।

देखो न ये सहर भी वीरान पड़ा है...
मेरे सफर में प्लेटफॉर्म तो है, पर सायद मेरे नही।

मेरी जिंदगी में कोई ठहराव नही...
बस ट्रैक है.... 
जिसपर ज़िंदगी को बस चलते जाना है।

काश! कुछ तो बरकत होती तेरे ईश्क़ में...
ज़िन्दगी का ये सफर यूँ तन्हा न होता।



काश! कुछ तो बरकत होती तेरे ईश्क़ में... ज़िन्दगी का ये सफर यूँ तन्हा न होता।
Kash-kuch-to-barkat-hoti-tere-ishk-me

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✍️Shikha Bhardwaj❣️

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