पीले रंग की विशेषता, क्यों हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण, अद्भुत जानकारी, संदेस।

पीले रंग की विशेषता, क्यों हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण है, अद्भुत जानकारी, संदेस।

पीले रंग की विशेषता, क्यों हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण है, अद्भुत जानकारी, संदेस।




आज मैं बात करूँगी रंगों की, जिसमे भी एक खास रंग पीला की।

प्रकृतिमें जितने भी रंग है, उन सब रंगों की अपनी एक खासियत है, एक अलग पहचान, गुण और सबमे कुछ खास संदेस के साथ सीख भी छुपा है।

तो आइए जानते हैं, क्या है खासियत पीला रंग की, क्यूँ और किसलिए जरूरी है पीला रंग।

"पीला रंग", उसकी खासियत उसमे छिपे विशेष सीख, ज्ञान और संदेस।


पीला रंग को हिन्दू धर्म मे सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है। पीला से मिला-जुला रंग, गेरूआ और भगवा एक ही है।

#Navratri2022 

पीले रंग की विशेषता, क्यों हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण है, अद्भुत जानकारी, संदेस।




प्रकृति भरी पड़ी है, अनगिनत रंगों की बहारो से
तो क्यूँ न करे बात आज कुछ खास रंग, पीला से।

अग्नि का भी रंग है पीला, जिसका है अंदाज रंगीला
नारायण का वस्त्र पीताम्बर, जो श्याम वर्ण को करता और भी सुन्दर।

पीला एक रूप वैराग्य धरा तो दूजा पतझड़ लिये खड़ा।
सूर्यदेवय का रंग सजीला पीला तो, सारे मांगलिक कार्य भी अधूरा, बिना रंग पीला।

यह रंग ज़ुरा सूर्योदय और सूर्यास्त से,
जो जीवन को भरता सदा ज्ञान के प्रकाश से।

पीला रंग हिन्दू की चिरंतन, सनातनी, संस्कृति का,
तो रंग त्याग, बलिदान, ज्ञान, शुद्धता एवं सेवा का। 

ठीक वैसा ही केसरिया रंग भी मामूली-सा अंतर के साथ है। 



रंगों का प्रभाव मनोस्थिति पर भी पड़ता है, और हमारे सनातन संस्कृति में ऋषियों ने अनन्त काल से ही मनोविज्ञान और उसके मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को जानकर ही हिन्दू धर्म में कुछ विशेष रंगों को विशेष कार्यों में शामिल किया है। 

इन्हीं कारणों से, मैंने यहाँ रंगों को हिन्दू धर्म और उनकी आस्था से जोड़कर बताने की कोशिश की है।

आइए जानते हैं कि हिन्दू धर्म में क्यों महत्वपूर्ण हैं ये सभी रंग और पीला रंग क्यों सबसे ज्यादा महत्व रखता है।

यूँ तो वैज्ञानिकों के अनुसार मूलत: पांच रंग ही होते हैं, जो है काला, उजला, लाल, नीला और पीला। जिसमे काले और सफेद रंग को रंग मानना मजबूरी जैसा ही है, क्योंकि यह कोई रंग नहीं है। तो बस अब केवल तीन मुख्य रंग बच जाते हैं- लाल, पीला और नीला। 

आप कभी आग जलते हुए देखना, उसमें यही तीन रंग ही दिखाई देते हैं, जो है- लाल, पीला और नीला।

सफ़ेद अधिकांशतः आप हम देखते हैं कि जब कोई रंग इस्तेमाल करते - करते  फेड हो जाता है और वह सफेद रंग का रूप धारण कर लेता है।या फिर कभी-कभी जब कोई रंग बहुत गहरा हो जाता है तो वह काले रंग के स्वरूप में दिखाई देने लगता है। साथ ही लाल रंग में अगर पीला रंग मिला दिया जाए, तो वह केसरिया रंग के।स्वरूप।में।आ जाता है। नीले में पीला मिल जाए, तब हरा रंग बन जाता है। इसी तरह से नीला और लाल मिलकर जामुनी बन जाते हैं। आगे चलकर इन्हीं प्रमुख रंगों से हजारों रंगो नवनिर्वित हो जाते हैं।

अग्नि हमारे मनोस्थिति की तरह है, जब वह नियंत्रित होता है,तब शांत दिखाई देती है, लेक़िन वही जब व्याकुल या उग्र स्थिति में होता है, तो।प्रलय का काम करता है। जलाना, भस्म करना इसके उग्र स्थिति का स्वरूप है। लेक़िन वही अग्नि जब नियंत्रण की स्थिति में होता है, तब शांत संन्यासी के स्वभाव की तरह होता है, लेकिन वह किसी को जलाने के लिए नहीं बल्कि ठंड जैसे हालात में ऊर्जा देने के लिए सूर्य की तरह होता है। संन्यासी का पथ भी अग्निपथ ही होता है। ऐसा कहा जाता है कि अग्नि बुराई का विनाश करती है और अज्ञानता की बेड़ियों से भी व्यक्ति को मुक्त करवाती है।



 






























1 Comments

If you have any doubt, please let me know.

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति 👌👌

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