ये जो तू अश्क बन, आँखों से ढलका है अभी_ye jo tu ashk ban, aankho se dhlka hai abhi
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ये जो तू अश्क बन, आँखों से ढलका है अभी_ye jo tu ashk ban, aankho se dhlka hai abhi |
ये जो तू अश्क बन, वक्त-वेवक्त, हवा में धूप में ये जो तू अश्क बन, आँखों से ढलका है अभी..
मेरी हाथों से.., यूँ ही वाबस्ता, ये जो तू अश्क बन, आँखों से ढलका है अभी। कैसे कहूँ! आँखों की सहेली, अश्क में तू, समेट कर उन सभी लम्हों को, ये जो तू अश्क बन, आँखों से ढलका है अभी। सज़ा लूँ, उन वीरानियों को.... तेरी यादों से ही सही, वक़्त के उन लम्हों संग, बस ज़िन्दगी बसर हो अभी। मुझमें महकता है अब भी कहीं, फिर भी तुझे ख़बर नही, तू अब भी मुझमे पूरा है कहीं। #ये जो तू अश्क बन, आँखों से ढलका है अभी। Ye-jo-tu-ashk-ban-aankho-se-dhlka-hai-abhi #तू_अब_भी_मुझमे_पूरा_है_कहीं।#Tu_ab_bhi_mujhme_pura_hai_kahin कविता परिचय: ज़िंदगी चलती रहती है, रुकती नही, पर इसे हर हाल में खुशी में तपदिल करे।उम्मीद है आप सबको ये शायरी या quotes पसंद आए। ✍️Shikha Bhardwaj❣️ | , |

बहुत सुंदर प्रस्तुति 🙏🙏
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