मेरी कहानी: तुम से तुम तक
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| मेरी कहानी: तुम से तुम तक |
कुछ यादें सिर्फ़ दिल में ही बस जाती हैं। कुछ सुबहें, कुछ लम्हें, और कुछ मुस्कानें… जो हमेशा हमारे साथ रहती हैं। मेरी कहानी भी उन यादों से शुरू होती है, उस नर्म धूप की सुबह से, जब आँखों में शरारत थी और दिल में हलचल।
किसी ने गिरते गुलमोहर के फूलों को जमीन पर गिरने से पहले अपनी हथेली में समेट लिया था। वो पल शायद साधारण था, पर उसी साधारण पल में एक अनकही शुरुआत छुपी थी।
कुछ खास वजह तो नहीं थी, फिर भी मेरी सारी कहानी वहीं से शुरू हुई— और शायद उसी पर खत्म होने की भी।
समय बदल गया, लोग बदल गए, पर हमारी राहें अब एक-दूसरे से जुड़ी हैं। हमने हाथ थामकर, बेपरवाहियों की सारी कसमें खाकर, समाज की रीतें तोड़कर, हवाओं के रुख मोड़कर साथ चलने का फैसला किया है।
क्योंकि अब मेरी कहानी सिर्फ़ “तुम से तुम तक” है।
स्नेहिल धागों से तुम्हें जोड़कर, जो बस चले मेरा, तुम्हें पलकों के शामियाने में कैद कर, धड़कनों में जोड़कर रख लूँ — क्योंकि मेरी कहानी “तुम से तुम तक” है।
तुम से शुरू मेरी सुबह, तुम तक ही ज़िंदगी की शाम। साथ हमारा सांसों की आख़िरी डोर तक।
मैं लिखूँ अपनी सारी कहानी, तुम से तुम तक।
हर कहानी की अपनी एक खुशबू होती है। कुछ लम्हें बस यादों में रह जाते हैं, कुछ रिश्ते हमारी ज़िंदगी का रास्ता बन जाते हैं।
मेरी कहानी, मेरी सुबह और मेरी शाम — अब सब तुम्हारे नाम। क्योंकि ये मेरी कहानी है…
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Lautati barisho ke maysam me kuch adhure se ehsas.
तुम से तुम तक।
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— Aparichita
